Tuesday, November 9, 2010

चढ़ता पानी

उतरते पानी को देर नहीं लगती
दरारों-ढलान का साथ जो है,
वो तो चढ़ते पानी का नसीब ठहरा
हर मोड़ पे बरसों की मेहनत है.

शोरो-ग़ुल भी करता है
तो करता है उतरता पानी,
वो तो चढ़ते पानी का नसीब ठहरा
जो चुप सा चट्टानों को कलम करता है.

मशहूर है खूबसूरत कर
जब है उतरता पानी,
वो तो चढ़ते पानी का नसीब ठहरा
जो बदनाम है तबाही के लिए.

पर तुझे सलाम, ऐ चढ़ते पानी..

के वक़्त की सीढियों को
जूझता हुआ बढ़ा है,
सूखे-प्यासे कुओं में
तू बेझिझक चढ़ा है.

दरारों-ढलान = cracks & slopes, शोरो-ग़ुल = loud noise, कलम = behead, kill, जूझता = struggle, बेझिझक = uninterrupted, without fear or doubt

6 comments:

  1. लाजवाब, वंदना!!!

    I am proud of you for one more reason...you are able to write so very poetically in हिंदी, our national language

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  2. My first language is Hindi...I studied in that medium :) thanks for your comment. I wish I was as fluent in my mother tongue marathi too...but am not :) there Anagha has the baton ;)

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  3. :) right...param pujya aadarniya Anagha Devi ki Jai!!!

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  4. Oye!!! :) What is happening here?? :)

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  5. just our tactics make u comment on this post :)

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Thanks for stopping by :)