Friday, October 1, 2010

वरदान

राज्य मिलेगा पर राजा-रानी साथ न रह पाएंगे. सोने की थाल सजेगी पर खाने को भोजन न मिलेगा. रमणीय वन-उपवन होंगे पर पैर धरने को वसुंधरा नहीं लावा होगा. मित्रगण भरपूर आएँगे पर बित्ती भर भी बात न कर पाएंगे. बेरोक टोक आवाजाही नसीब होगी पर गंतव्य पर आप का स्वागत नहीं है. पैरों में पाज़ेब पहनाये जायेंगे पर चलना दबे पाँव ही होगा. मधुर स्वर के स्वामी बनो पर गुनगुनाना मना है. सबकुछ मिलेगा पर उसके भोग पर मनाही है.

हर सौगात के साथ एक परिच्छेद जो उस उपहार के मायने ही बदल दे. यह कैसा वरदान है के देनेवाला देते देते मेरा ही कुछ लेता जाए ?

रमणीय = beautiful, वसुंधरा = earth, बित्ती भर = a little bit, आवाजाही = thorough fare, गंतव्य = destination, परिच्छेद = clause/condition, वरदान = blessings

4 comments:

  1. Is it all about...the glass half empty or half full?

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  2. But even a half full glass which you are not allowed to drink is as good as empt only na???

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  3. It's all about how you take it Vandu. You can be unhappy or you can enjoy...आयुष्याचा जो आनंद तुझा म्हणून तुला मिळालाय त्यात... :)

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